
उत्तरकाशी। अगस्त 2012 की बाढ़ के बाद कराए गए बाढ़ सुरक्षा कार्यों में गड़बड़ी के आरोप में एक साथ उत्तरकाशी डिवीजन में तैनात 11 अभियंताओं के तबादलों को कार्रवाई माना जा रहा है, लेकिन अभियंता इसे रूटीन ट्रांसफर मानते हैं।
अगस्त 2012 की बाढ़ के बाद जिले में सिंचाई विभाग को 61.15 करोड़ के बाढ़ सुरक्षा कार्य सौंपे गए थे। निम्न गुणवत्ता के आरोप के बाद तत्कालीन डीएम ने तो गंगोरी में एक दीवार ही ढहा दी। जून 2013 की बाढ़ में बाढ़ सुरक्षा कार्यों पर सवाल उठने पर सीएम ने गढ़वाल कमिश्नर को इसकी जांच सौंपी।
अधिकारियों का तबादला हुए बगैर जांच हुई। कमिश्नर ने मौके से निर्माण सामग्री के 31 सैंपल जांच के लिए आईआईटी रुड़की भिजवाए। जांच के दौरान उन्होंने निर्माण में खामियां एवं अनियमितताएं स्वीकारी थीं। अब अचानक ईई समेत 11 अभियंताओं का तबादला कर दिया गया है। लेकिन स्थानीय लोग करोड़ों के गोलमाल के बाद महज ट्रांसफर की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं।
कोट…….
उत्तरकाशी में सिंचाई विभाग की ओर से कराए गए बाढ़ सुरक्षा कार्यों की स्थलीय जांच कर निर्माण सामग्री के 31 सैंपल जांच के लिए आईआईटी रुड़की को भेजे गए हैं। उनकी अभी रिपोर्ट नहीं आई है। अपनी जांच की रिपोर्ट मैंने शासन को सौंप दी है।- डीएस गर्ब्याल, गढ़वाल कमिश्नर।
बाढ़ सुरक्षा कार्यों की जांच से पहले अभियंताओं को हटाने की बात कही गई थी, ताकि जांच प्रभावित न हो। जांच के बाद अब यह रुटीन ट्रांसफर हैं। उत्तराखंड में 10 अधिशासी अभियंताओं समेत कई अन्य एई एवं जेई के भी ट्रांसफर हुए हैं।- चंद्रशेखर, ईई सिंचाई विभाग।
अभियंताओं के ट्रांसफर कर सरकार बाढ़ सुरक्षा कार्यों में करोड़ों के घोटाले की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। बाढ़ सुरक्षा कार्य में गड़बड़ी करने वाले ठेकेेदारों को ब्लैक लिस्ट किया जाना चाहिए तथा घटिया गुणवत्ता के कार्यों पर खर्च हुए पैसा अभियंताओं एवं ठेकेदारों से वसूला जाना चाहिए।
गोपाल रावत, पूर्व विधायक गंगोत्री क्षेत्र।
